नई दिल्ली, नवम्बर 18 -- सर्प का सिर काट कर अलग कर दिया जाए, तो शरीर का शेष भाग जिसे कबंध कहते हैं, विषहीन होने के कारण अविषय होता है। सर्प के मुंह में विष होता है, इसलिए सिर विषय है। अतः राहु=सिर=विषय। केतु=कबंध =अविषय। विषय होने से राहु मारक तथा केतु अविषय होने से अमारक हुआ। केतु चिकित्सक है। केतु ज्ञानवान है। केतु यश है। केतु शिखी है। शिखी नाम मयूर तथा शिखाधारी पाखंडीद्विज का है। मयूर सर्प खाता है, किंतु कर्णप्रिय ध्वनि उगलता है। मयूर देखने में मनोहर होता है। आचारहीन मात्र लंबी शिखा रखने वाला द्विज शिखी कहलाता है। यह ऊपर से अच्छा, अंदर से खल होता है। अग्नि को भी शिखी कहते हैं। लंबी- लंबी लपटें एवं धुआं इसकी शिखा हैं। लपटें जलाने वाली तथा धुआं कालिख एवं घुटन पैदा करने वाला होता है। केतु का प्रभाव ठीक ऐसा ही होता है। केतु ध्वज है। ध्वज अर...