कटिहार, दिसम्बर 14 -- कटिहार, हिन्दुस्तान प्रतिनिधि कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय की शाम अब पहले जैसी नहीं रही। हॉस्टल में पढ़ाई खत्म होने के बाद जो समय पहले आत्मअध्ययन में बीतता था, अब वही समय बेटियों के सपनों को आकार देने में लग रहा है। शाम चार बजते ही 65 इंच की स्क्रीन पर जेईई-नीट की क्लास शुरू होती है और 100 से अधिक छात्राएं एक साथ डॉक्टर और इंजीनियर बनने की तैयारी में जुट जाती हैं। ग्रामीण और पिछड़े परिवारों से आने वाली इन छात्राओं के लिए महंगी कोचिंग अब सपना नहीं रही। फिजिक्सवाला के फ्री ऑनलाइन एक्सेस से उन्हें वही शिक्षक, वही कंटेंट और वही टेस्ट मिल रहे हैं, जो बड़े शहरों के छात्र लेते हैं। संभाग प्रभारी कुमार राजीव रंजन ने बताया कि खास बात यह कि पढ़ाई हिंगलिश माध्यम में हो रही है, जिससे कठिन टॉपिक भी आसानी से समझ में आ रहे हैं...
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