नई दिल्ली, जनवरी 27 -- हेमलता कौशिक नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने अपने एक आदेश में स्पष्ट किया कि केंद्रीय सैन्य बल में नियुक्ति पाने वाले जवान को कम से कम दस साल सेवा देना जरूरी है। उच्च न्यायालय का तर्क था कि एक सैन्य बल को तैयार (प्रशिक्षण) करने में लाखों का खर्च आता है। ऐसे में कर्मी द्वारा मर्जी से नौकरी छोड़ने पर राजकोष नुकसान नहीं उठाएगा। न्यायमूर्ति बी कामेश्वर राव एवं न्यायमूर्ति मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की पीठ ने केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) में सब इंस्पेक्टर के पद पर नियुक्ति पाने के बाद नौकरी छोड़ने वाले उम्मीदवार को राहत देने से इनकार कर दिया। इस उम्मीदवार ने प्रशिक्षण के समय जमा कराए गए दो लाख 57 हजार 544 रुपये मय ब्याज के वापस कराने के लिए याचिका दायर की थी। पीठ ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि सैन्य बल म...
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