बुलंदशहर, नवम्बर 10 -- औरंगाबाद के प्राचीन नागेश्वर शिव मंदिर के मैदान में श्रीमद भागवत कथा के सातवें दिन वृंदावन धाम से पधारे आचार्य पंडित सोनेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि भगवान कृष्ण के बालसखा जो अत्यंत दीन‑भिक्षु थे। गरीबी में भी उन्होंने कृष्ण की भक्ति नहीं छोड़ी थी। जब वे द्वारका पहुँचे तो कृष्ण ने नंगे पैर दौड़कर उनका स्वागत किया था। चरण धोए और उन्हें गले लगाया था।जिस कारण महल में मौजूद लोग अचंभित रह गए थे।राजा परीक्षित ने सात दिन तक श्रीमद् भागवत कथा सुनी, जिससे उनका मृत्यु‑भय दूर हो गया। कथा के अंत में तक्षक नाग ने उन्हें डसा, परन्तु कथा‑श्रवण के प्रभाव से उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई थी।भागवत कथा के समापन पर व्यासजी (वेदव्यास) की पूजा बेहद जरूरी है। यह गुरु‑कृतज्ञता का प्रतीक है; कथा‑वाचक द्वारा पुष्पांजलि, दुग्धाभिषेक और मंत्र...
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