गया, नवम्बर 22 -- दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) के कृषि विभाग द्वारा "कृषि ही संस्कृति एवं भविष्य" विषय पर विशेष चिंतन-सत्र का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य कृषि शिक्षा में नवाचार, सहयोगात्मक शोध, विचार-साझेदारी तथा उत्कृष्टता के नए मार्ग तलाशना था। विश्वविद्यालय के कृषि विभाग में आयोजित इस सत्र में विशेषज्ञों ने कृषि के बदलते स्वरूप, उसके वैश्विक महत्व और भावी संभावनाओं पर विस्तार से विचार-विमर्श किया। सत्र को संबोधित करते हुए आरपीसीएयू, पूसा के पूर्व कुलपति प्रो. पी. एस. पांडे ने कहा कि कृषि को मन, हाथ और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से करने पर नवाचार, उद्यमिता और आत्मनिर्भरता के द्वार खुलते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि "पुसा" शब्द वैदिक परंपरा में 'पुसने देवता' से जुड़ा है, जो भारतीय कृषि की आध्यात्...