मुजफ्फरपुर, सितम्बर 10 -- मुजफ्फरपुर। पर्यावरण संरक्षण के मद्देनजर प्रशासन ने बूढ़ी गंडक नदी के अखाड़ाघाट पर प्रतिमाओं के विसर्जन पर तो रोक लगा दी है, लेकिन दादर में कृत्रिम घाट पर जो व्यवस्था रहती है, उसमें कई खामियां हैं। एक तो शहर से दूरी, ऊपर से गंदा पानी, कूड़ा-कचरा और कम जगह के कारण प्रतिमा विसर्जन में दुश्वारियों का सामना करना पड़ता है। इससे शहर की दुर्गा पूजा समितियों में असंतोष है। इनका कहना है कि पर्यावरण संरक्षण के दृष्टिकोण से अब मूर्तियों के निर्माण में केमिकल युक्त रंगों का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। अगर हो रहा हो तो उसपर प्रशासन सख्ती करे। मिट्टी से बनी प्रतिमाओं को पुरानी परंपरा के तहत नदी में ही विसर्जित करने की अनुमति दी जाए, ताकि लोगों की आस्था को भी ठेस नहीं पहुंचे और पर्यावरण संरक्षण का उद्देश्य भी पूरा हो सके। इस मु...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.