वाराणसी, दिसम्बर 8 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। कृति, विकृति और आकृति में ही संसार का स्वरूप है। त्रिगुणात्मक सृष्टि के क्रमिक विकास में यही तीन सर्वाधिक सहायक हैं। यह तीनों ही किसी न किसी रूप में भगवान शिव का अंग हैं। ये वे तत्व हैं जो जगत में पंच तत्वों को कार्य करने के लिए एक सुदृढ़ योजना प्रदान करते हैं। ये बातें स्वामी भगवान वेदांताचार्य ने कहीं। वह फलाहारी बाबा आश्रम की ओर से शिवपुर रामलीला मैदान में हो रहे महालक्ष्मी महायज्ञ के निमित्त आयोजित शिवमहापुराण कथा के तीसरे रविवार को प्रवचन कर रहे थे। फलाहारी बाबा संत सेवा ट्रस्ट एवं महामंगल सेवा समिति के आयोजन में उन्होंने कहा कि जहां तक संसाधनों के निर्माण का प्रश्न है तो उसमें निहित साधन ही स्वतःस्फूर्त जागृत हो जाती है। उन्होंने कहा कि माहेश्वर सूत्रों में विज्ञान की धारा मूर्त रूप से...