बांका, अक्टूबर 16 -- बांका, नगर प्रतिनिधि। एक समय था जब जिले की नदियाँ जीवनदायिनी थीं। जिले की नदियाँ खेतों को सींचती थीं, पशुओं को पानी देने के साथ साथ बच्चों का क्रीड़ास्थल और बड़ों की श्रद्धा का केंद्र थीं। आज वही नदियाँ बदहाल हैं, उनकी धार मंद हो गई है। जबकि उन नदियों का तल कचरे से पट गया है, और जल प्रदूषण की पराकाष्ठा को छू रहा है। वजह नगर परिषद की लापरवाही और गैरजिम्मेदाराना रवैया, जिसके चलते जिले की प्रमुख नदियाँ कूड़े‑कचरे का डंपिंग ज़ोन बन चुकी हैं। जिले की प्रमुख नदियाँ चाहे वह चांदन नदी हो या फिर ओढ़नी नदी हों, आजकल वहाँ पानी के साथ कूड़े‑कचरे की धाराएँ बहते जा रही हैं। नगर परिषद द्वारा कुछ समय से तमाम वार्डों की सफाई करने के उपरांत क्षेत्रों से मिले कचरे को नदियों में बहा दिया जा रहा है। मानों कि प्रतिदिन नगर परिषद बांका क्षेत्र...
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