लातेहार, नवम्बर 25 -- लातेहार,प्रतिनिधि। शहर के राधाकृष्ण मंदिर के समीप अवस्थित ऐतिहासिक गांधी पुस्तकालय आज उपेक्षा और कूड़ा-करकट के बीच अपनी पहचान खोने को विवश है। लगभग 50 वर्ष पूर्व स्थानीय लोगों की पहल पर स्थापित यह पुस्तकालय कभी ज्ञान, अध्ययन और साहित्यिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र हुआ करता था। इतिहास, भूगोल, विज्ञान और धार्मिक विषयों सहित अनेक दुर्लभ पुस्तकों का यहां समृद्ध संग्रह था। स्थानीय निवासी योगेश्वर प्रसाद, विशाल शर्मा और जवाहर अग्रवाल ने बताया कि एक समय ऐसा भी था जब आरपास क्षेत्र के लोग यहां बैठकर पढ़ाई करते थे और पुस्तकालय लोगों की उपस्थिति से हमेशा गुलजार रहता था। स्थानीय लोगों ने दु: ख व्यक्त करते हुए कहा कि पुस्तकालय की दुर्लभ किताबें अब कहां हैं, इसकी कोई स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है। समय के साथ पुस्तकालय में देखरेख ...
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