मिर्जापुर, जुलाई 30 -- मिर्जापुर,संवाददाता। भारतीय प्राचीन संस्कृति में सावन शुक्ल पंचमी को नागपंचमी के रूप में मनाने की परंपरा है। भूत भावन भगवान भोले नाथ के गण के रूप में सर्पों के पूजन का विधान है। सो नागपंचमी पर सुबह सबेरे स्नान ध्यान कर महिलाओं ने नाग देवता को दूध और धान का लावा चढ़ाकर उनसे परिवार के सदस्यों की सुरक्षा के लिए प्रार्थना की। तो युवाओं ने अखाड़े पर कुश्ती और खेल के मैदान पर देशी कुड़ी डाक, कबड्डी, जोड़ी-गदा और नाल फेर कर अपनी हैरत अंगेज शारीरिक कला और सौष्ठव का प्रदर्शन किया। सुबह होते ही कुछ इन्हीं भावनाओं से ओत-प्रोत हर घर में नाग देव का पूजन किया गया। इसके बाद महिलाएं पूड़ी-पकवान बना कर नागपंची की खुशियों को सांझा किया। नगर के भटवा की पोखरी स्थित नागदेवता मंदिर में नाग देव को दूध-लावा का भोग लगाने के लिए महिलाओं की भ...
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