चमोली, नवम्बर 16 -- कर्णप्रयाग। चमोली जिले के गौचर में आयोजित राजकीय औद्योगिक विकास एवं सांस्कृतिक मेले में युवाओं और बुजुर्गों को पहाड़ी टोपी खूब भा रही है। ऊन से बनी इन गर्म टोपियों को लोग दिल्ली, देहरादून, मेरठ, बरेली व नोएडा सहित अन्य शहरों में अपने रिश्तेदारों को समौंण के रूप में भेज रहे हैं। गौचर में पहाड़ी टोपियों और ऊनी कपड़ों की दुकानें सजी हैं। ये परिधान युवाओं के दिलों की धड़कनें बनी हुई हैं। जानकारी के अनुसार पहाड़ी या गढ़वाली टोपी को पहनने की शुरुआत नौवीं शताब्दी में चांदपुरगढ़ी के राजा भानुप्रताप के शासनकाल में हुई थी। इस काल में मृगछाला व ऊन से टोपी बनाने का काम शुरू हुआ था। हालांकि शुरुआती दौर में लोग टोपी नहीं पहनते थे, बल्कि पग्गड़ या डांटा इस्तेमाल करते थे। भानुप्रताप ने अपना राज्य कनकपाल को सौंपा था। फिर कनकपाल चांदपुर...