कानपुर, जनवरी 16 -- कानपुर, मुख्य संवाददाता। इंदौर की घटना के बाद शहर में दूषित जलापूर्ति से जंग के लिए आखिरकार कुंभ से मिलीं पाइपें ही काम आईं। जब तक टेंडर स्वीकृति की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती तब तक प्रयागराज से आईं पाइपें ही काम आ रही हैं। इसी के जरिए जलकल ने सीवर और पानी की पाइप लाइनों को अलग-अलग किए जाने का अभियान शुरू कर दिया है। इसी बीच सभी छह जोन में सर्वे का काम भी पूरा हो गया है। अब 28 स्थान ऐसे मिले हैं जहां एक ही जगह से सीवर और पेयजल की पाइप लाइनें गुजर रही हैं। इसकी कुल लंबाई 38 किलोमीटर है। इतनी ही लंबी पानी की पाइप लाइनें बदली जाएंगी। प्रयागराज में कुंभ के दौरान एहतियात के तौर पर भारी मात्रा में पानी की पाइपें मंगाई गईं थीं। इन्हें सुरक्षित रखा गया था ताकि जरूरत पड़ने पर बदली जाएं। जब पाइपें बच गईं तो जिन शहरों को जरूरत थ...
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