नई दिल्ली, सितम्बर 20 -- पुरानी दिल्ली के कश्मीरी गेट के पास समय की धूल में लिपटी सड़कें इतिहास की गूंज सुनाती हैं। यहां खड़ा है 'ब्रिटिश मैगजीन', एक ऐसा स्मारक है, जो 1857 के विद्रोह की आग और जज्बे को आज भी जिंदा रखता है। यह इमारत सिर्फ पत्थरों का ढांचा नहीं, बल्कि उस तूफानी दौर की गवाह है, जब हिंदुस्तान ने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ बगावत की हुंकार भरी थी। आज हम इसी ब्रिटिश मैगजीन की कहानी बता रहे हैं।एक हवेली से सैन्य गोदाम तक 19वीं सदी के शुरुआती दौर में, जब ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी दिल्ली पर अपनी पकड़ मजबूत कर रही थी, तब मुगल शहजादे दारा शिकोह की हवेली की जमीन पर यह ब्रिटिश मैगजीन बनाया गया। इसका मकसद था हथियारों, बारूद और गोला-बारूद को सुरक्षित रखना। कश्मीरी गेट के नजदीक होने की वजह से यह ब्रिटिश सेना के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम था...
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