हल्द्वानी, नवम्बर 9 -- आज उत्तराखंड रजत जयंती दिवस मना रहा है। कई सालों के संघर्ष के बाद राज्यवासियों को उत्तराखंड मिला। यह एक रात में लिया फैसला नहीं था... इसके लिए सैकड़ों ने अपने खून-पसीना और आंसू का कतरा-कतरा झोंक दिया। बात साल 1994 की है, जब उत्तराखंड राज्य आंदोलन अपने चरम पर था। युवाओं पर पुलिस की बर्बरता, महिलाओं पर अत्याचार और आंदोलनकारियों की गिरफ्तारी ने पूरे प्रदेश को हिला दिया था। ऐसे दौर में हल्द्वानी में शिक्षिका खीमा बिष्ट ने सरकारी नौकरी की परवाह किए बिना परिवार संग आंदोलन में कूदने का साहसिक फैसला लिया। 78 वर्षीय खीमा बिष्ट ने हिन्दुस्तान से राज्य आंदोलन के दौरान किए संघर्षों को साझा किया। बताया कि उत्तराखंड राज्य की मांग को लेकर जनाक्रोश चरम पर था। उन्होंने पहले स्कूल में पढ़ाने के बाद आंदोलन में हिस्सा लेना शुरू किया, पर...
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