भागलपुर, फरवरी 14 -- भागलपुर, वरीय संवाददाता नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया बेंगलुरू के प्रो. संजय जैन ने कहा कि भारतीय संविधान किसी भी विदेशी संविधान या भावना का प्रतिरूप नहीं है। बल्कि ये हमारी भारतीय संस्कृति, संविधान निर्माताओं की गहन सोच व विचार-विमर्श का परिणाम है। जिसे हम सब भरतीय अपने-अपने धर्मग्रंथ से भी पवत्रि मार्गदर्शिका मानते हैं। प्रो. जैन, टीएनबी आईएक्यू द्वारा गुरुवार को कॉलेज में आयोजित 'ग्लिम्पसेस ऑफ इंडियन कान्स्टिटूशन, सम रिफ्लेक्शन विषयक सेमिनार को बतौर मुख्य वक्ता संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान में मौलिक अधिकार, नीति नर्दिेशक तत्व, न्यायपालिका, कार्यपालिका तथा विधायिका के बीच जो सामंजस्य है वह दुनिया में अन्यत्र कहीं देखने को नहीं मिलता है। उन्होंने बताया कि भारतीय संविधान को जिन बातों से खतरा है, वह एकल...
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