वाराणसी, नवम्बर 30 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। काशी संस्कृति, अध्यात्म और शैक्षिक चेतना की जन्मस्थली है। काशी से विकसित भारत का शंखनाद पूरे देश को दिशा देगा। इसका प्रमाण इस ज्ञान यज्ञ में शामिल हुए प्रतिनिधियों को देखकर सहज ही मिल रहा है। सकारात्मकता, समय प्रबंधन और निरंतर सीखने की प्रवृत्ति विकसित भारत के लिए अनिवार्य है। ये बातें अवध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.बिजेंद्र सिंह ने कहीं। वह बीएचयू के पत्रकारिता एवं जनसंप्रेषण विभाग की ओर से आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के समापन समारोह में रविवार को मुख्य अतिथि थे। उन्होंने कहा कि गुरुकुल परंपरा के आदर्श, अनुशासन, संयम और ज्ञान युवाओं के जीवन में वापस आने चाहिए। महामना के विचार स्वदेशी, स्वावलंबी और आत्मनिर्भर भारत को लेकर थी। वही आज विकसित भारत के लक्ष्य का मुख्य विषय है। जीवन ...