लखनऊ, नवम्बर 24 -- लखनऊ, विशेष संवाददाता। बीते कुछ समय में लगातार अभियंताओं पर हुई कार्रवाई को विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने निजीकरण के विरोध का उत्पीड़न करार दिया है। संघर्ष समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने कहा कि अभियंता शांतिपूर्ण विरोध कर रहे हैं, लेकिन कॉरपोरेशन प्रबंधन उनके उत्पीड़न पर उतारू है। प्रबंधन की कार्रवाइयों से ऊर्जा निगमों में काम का माहौल बिगड़ गया है। संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अनुरोध किया है कि वह प्रभावी हस्तक्षेप करके निजीकरण का फैसला निरस्त करें। कॉरपोरेशन प्रबंधन को निर्देश दें कि उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयां वापस ली जाएं। संघर्ष समिति ने कहा कि तमाम अभियंताओं पर एफआईआर हो रही है। कार्यालय समय के बाद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में हिस्सा न लेने के लिए 87 अभियंताओं के प्रमोशन रोक दिए गए।
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