नई दिल्ली, जनवरी 24 -- भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने शनिवार को कहा कि उच्च न्यायालयों को कानून के शासन में व्यवस्थागत विफलताओं को लेकर अधिक सतर्क और सक्रिय रहने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि न्याय में देरी न केवल न्याय से इनकार है, बल्कि न्याय का विनाश है। मुख्य न्यायाधीश ने यहां दो कार्यक्रमों में अपने विचार रखे। उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट की ओर से आयोजित अभिनंदन कार्यक्रम में बोलने के बाद फली नरीमन स्मृति व्याख्यान को संबोधित किया। बॉम्बे हाईकोर्ट की ओर से आयोजित अभिनंदन कार्यक्रम में सीजेआई ने इस बात पर जोर दिया कि हाईकोर्ट केवल शीर्ष अदालत तक पहुंचने का माध्यम नहीं हैं। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट आम नागरिक की दहलीज की रक्षा करने वाले प्राथमिक प्रहरी हैं, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि कानून का शासन कोई दूर की अवधारणा नहीं, बल्...