पटना, नवम्बर 14 -- ईंट बांधकर तैरना जितना कठिन है, उतना ही मुश्किल किसी दल के लिए कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ना हो चुका है। यह बात 2017 में यूपी में अखिलेश यादव की करारी हार ने साबित की थी और वही स्थिति अब बिहार में हई है। यहां आरजेडी से लड़कर 62 सीटें कांग्रेस ने ली थीं और जब चुनाव नतीजे आए तो अब तक 6 सीटों पर ही कांग्रेस की बढ़त है। इस तरह उसका स्ट्राइक रेट 10 फीसदी से भी कम है। 2017 में यूपी चुनाव में 100 सीटों पर कांग्रेस ने चुनाव लड़ा था और 7 पर ही जीती थी। इस नतीजे को लेकर माना गया था कि कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ना सपा को भारी पड़ा। फिर उन्होंने 2017 में अपनी रणनीति में बदलाव किया और सपा अलग होकर चुनाव लड़ी थी। लेकिन तेजस्वी यादव ने कोई सबक नहीं लिया और 2017 वाली अखिलेश यादव की गलती बिहार में दोहरा दी। नतीजा सामने है। दरअस...