नई दिल्ली, अगस्त 7 -- नब्बे के दशक के अंत और 2000 की शुरुआत में दिल्ली का अंसल प्लाजा सिर्फ एक मॉल नहीं था, बल्कि एक सपना था। साउथ दिल्ली के बीचों-बीच बसा यह अर्ध-गोलाकार मॉल उस दौर में आधुनिकता की मिसाल था। परिवार, दोस्त, और प्रेमी जोडे यहां न सिर्फ खरीदारी के लिए आते थे, बल्कि यहां का हर पल उत्सव जैसा होता था। मैकडॉनल्ड्स की कतारें, प्लैनेट एम में कैसेट्स की खोज और बच्चों का खुली हवा में खेलना... यह सब अंसल प्लाजा को दिल्ली की शान बनाता था।अब वीरान हो चुका है मॉल लेकिन आज यह मॉल अपनी पुरानी रौनक खो चुका है। टूटी-फूटी एस्केलेटर और छत से टपकता पानी इसकी बदहाली की कहानी बयां कर रहा था। गलियारों में सन्नाटा पसरा था और कुछ कॉलेज के छात्र ही इधर-उधर भटकते नजर आए, जो शायद एक खुला कैफे या शांत कोना ढूंढ रहे थे। सफदरजंग एन्क्लेव की रहने वाली रचन...
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