प्रयागराज, जनवरी 21 -- इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग के पूर्व अध्यक्ष व आलोचक प्रो. राजेंद्र कुमार की स्मृति में बुधवार को उनके बंद रोड स्थित आवास पर गोष्ठी का आयोजन किया गया। प्रो. कुमार वीरेंद्र ने अपने गुरु को याद करते हुए कहा कि राजेंद्र जी कविता के रास्ते ही साहित्य में दाखिल हुए थे। उनकी कविताएं सावधि होते हुए भी निर्रवधी हैं। जिनका पहला काव्य संग्रह वर्ष 1978 में ऋण गुणा ऋण नाम से आया था। उनके पुत्र प्रियम अंकित ने श्रद्धांजलि देते हुए पिताजी की कविता 'मैं अपनी लघुता में जैसा हूं' का पाठ किया। केतन यादव ने 'घोषणाएं कुछ भी नहीं बताती' व 'साबुत दिल के बारिश का' पाठ किया तो आर्यन मिश्र ने वागर्थ कविता के मई के अंक में प्रकाशित उनकी कविता 'मां सरस्वती' का पाठ किया। प्रो. कुमार की कविताओं का पाठ करने वालों में प्रेयस अंकित, प्र...