प्रयागराज, जनवरी 11 -- प्रयागराज, संवाददाता। उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (एनसीजेडसीसी) के सभागार में रविवार को साहित्यिक संगोष्ठी के अंतर्गत माघ मेले के धार्मिक, सांस्कृतिक व लोक मंगलकारी स्वरूप पर वक्ताओं ने अपने विचार रखे। मुख्य वक्ता प्रो. राजेंद्र त्रिपाठी रसराज ने कहा कि गंगा, यमुना व सरस्वती की पावन त्रिवेणी में स्नान करना और कल्पवास करना ही माघ मेले का वास्तविक महात्म्य है। जो भारतीय आस्था और अध्यात्म की गहराई को दर्शाता है। डॉ. अजीत कुमार सिंह ने कहा कि मेला केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है बल्कि यह हमारी संस्कृति व कला का जीवंत उत्सव भी है। डॉ. सिंह ने कहा कि मेले में लोकगीत, भजन, कीर्तन, रामलीला व संतों के प्रवचन भारतीय कला परंपरा को जीवंत बनाए रखते हैं। डॉ. प्रमोद द्विवेदी ने कहा कि मेले में भ्रमण के दौरान कला,...