नई दिल्ली, जनवरी 8 -- सेशन कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली एक याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि वैवाहिक कलह की स्थिति में किसी महिला को गर्भ रखने के लिए मजबूर नहीं कर सकते। कोर्ट ने इसे महिला की शारीरिक गरिमा का उल्लंघन और मानसिक आघात को बढ़ाने वाला बताया। कोर्ट ने पति द्वारा दायर आपराधिक मामले से महिला को बरी कर दिया। दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा है कि वैवाहिक कलह की स्थिति में एक महिला को गर्भावस्था जारी रखने के लिए मजबूर करना उसकी शारीरिक गरिमा से उल्लंघन और मानसिक आघात को बढ़ाने वाला है। जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने महिला के स्वायत्त अधिकार पर जोर देते हुए कहा कि याचिकाकर्ता पत्नी को आईपीसी की धारा 312 (गर्भपात कराना) के तहत अपराध का दोषी नहीं ठहराया जा सकता।प्रजनन पर नियंत्रण महिलाओं की मूलभूत जरूरत और...
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