रांची, नवम्बर 26 -- रांची, प्रमुख संवाददाता। जैन मुनि पूज्य सुतीर्थ सागर महाराज ने कहा कि कर्म लौटकर वापस आता है, लेकिन यह कर्म के प्रकार और प्रकृति पर निर्भर करता है। अच्छे कर्मों से पुण्य मिलता है, तो बुरे कर्मों का फल बुरा होता है। और यह सभी सुख-दुख का कारण बनता है। आपके कर्मों के अनुसार ही आपको सुख या दुख मिलता है। बुरे कर्मों का परिणाम हमेशा बुरा ही होता है और अच्छे कर्मों का परिणाम अच्छा होता है। जैन मुनि बुधवार को रातू रोड में वासु पूज्य जिनालय में प्रवचन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जब आप कर्म का फल भोगते हैं, तो वे कण आत्मा से अलग हो जाते हैं और फिर से ब्रह्मांड में तैरने लगते हैं। कर्मों से मुक्ति पाने और मोक्ष प्राप्त करने के लिए ध्यान, तपस्या और नैतिक जीवन का पालन करना आवश्यक है। कर्मों के बंधन की तीव्रता कषायों की तीव्रता पर नि...