चंदौली, फरवरी 25 -- शहाबगंज, हिन्दुस्तान संवाद। कर्मनाशा नदी के तटवर्ती गांव इन दिनों जंगली सुअरों के आतंक से त्रस्त हैं। बड़गांव, शिवपुर, शहाबगंज, एकौना, मुरकौल, भूसीकृतपुरवा, नौडीहां, मचवल और अमांव समेत कई गांवों में लगभग हर रात 20 से 30 सूअरों का झुंड खेतों में उतर आता है और किसानों की तैयार फसलों को भारी नुकसान पहुंचा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार जंगली सुअर पहले खेतों की मेड़ों को तोड़ते हैं और फिर आलू की खुदाई कर पूरी फसल उखाड़ देते हैं। गन्ने के खेतों में घुसकर डंठलों को गिरा देते हैं। जिससे फसल चौपट हो जाती है। गेहूं और सब्जियों की खेती भी इनके हमले से सुरक्षित नहीं है। सुबह जब किसान खेतों पर पहुंचते हैं तो रौंदी हुई फसल और टूटी मेड़ें ही दिखाई देती हैं। किसानों का कहना है कि एक बीघा आलू की खेती में 25 से 30 हजार रुपये तक का खर्च आत...