हिन्दुस्तान ब्यूरो, नवम्बर 16 -- बिहार विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद दल में टूट रोकना राजद के लिए बड़ी चुनौती होगी। कभी पंद्रह वर्षों तक बिहार में राज करने वाले लालू प्रसाद ने दूसरे दलों को तोड़ने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी थी। आज जो दल (वामदल) उनके साथ हैं, उनके विधायकों को भी उन्होंने अपने पाले में कर लिया था। सपा और बसपा सहित अन्य दलों के विधायक भी तोड़े थे, लेकिन सत्ता से हटने के बाद राजद में भी टूट का दौर शुरू हो गया। खासकर 2010 के विस चुनाव में शर्मनाक हार के बाद विधायक, विधान पार्षद और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने दल छोड़ा था। इस चुनाव में भी पार्टी की शर्मनाक पराजय हुई है। ऐसे में दल को सुरक्षित रखना नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती है। राजद में सबसे बड़ी टूट 2014 में हुई थी। 14 फरवरी 2014 को राजद क...
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