प्रमुख संवाददाता, जनवरी 11 -- जेके जूट मिल (जियो जूट मिल) का नामोनिशां किताबों का हिस्सा हो जाएगा। जूट मिल बिकने जा रही है। 12 जनवरी को छह कंपनियां मिल की बोली लगाएंगी। सबसे अधिक बोली लगाने वाली कंपनी जूट मिल की परिसंपत्तियों की मालिक बनेगी। बिक्री से मिलने वाली रकम से मिल पर बकाया 275 करोड़ का भुगतान किया जाएगा। शेष राशि कंपनी के मालिकान को मिल जाएगी। सात दिसंबर 1931 को बनी जेके जूट मिल की शान कभी देशभर में थी। 31 जून 2003 को कंपनी लड़खड़ाई तो मजदूरों का बकाया होने लगा। 2007 में सारडा ग्रुप ने मिल को खरीद लिया था। आठ मार्च 2014 से मिल पूरी तरह बंद हो गई। इससे पहले 2008 से 2014 के बीच मिल को 12 बार बंद किया गया। कंपनी ने उत्पादन बंद कर दिया। इसके बाद कर्मचारियों की नौकरी पर संकट मंडराने लगा। जेके जूट मजदूर मोर्चा ने कर्मचारियों को बकाया व...