बाराबंकी, जनवरी 5 -- कहते हैं कि अगर इरादे फौलादी हों और मेहनत में ईमानदारी, तो मिट्टी भी सोना उगलने लगती है। इस कहावत को सच कर दिखाया है बाराबंकी जिले के सतीनपुरवा गांव के रहने वाले युवा किसान मोहम्मद सलमान ने। कभी मुफलिसी के बीच परिवार का पेट पालने के लिए दूसरों के खेतों में पसीना बहाने वाले सलमान आज खुद 25 से 30 लोगों को रोजगार दे रहे हैं। सलमान के परिवार में 14 सदस्य हैं। विरासत में उन्हें दो एकड़ खेत मिले थे। पारंपरिक ढंग से धान और गेहूं की खेती से मुश्किल से घर का खर्च, दवाइयां और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी हो पाती थीं। हालात इतने तंग थे कि अतिरिक्त पैसों के लिए सलमान को दूसरों के खेतों में मजदूरी तक करनी पड़ती थी। लेकिन, उनके मन में कुछ बड़ा करने की तड़प हमेशा बरकरार रही।2016 में बदली सोच और बदला तरीका साल 2016 में अपनी पढ़ाई पूरी कर...