नई दिल्ली, नवम्बर 9 -- हर साल मार्गशीर्ष मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान शिव के रौद्र स्वरूप काल भैरव की जयंती मनाई जाती है। यह दिन भैरव भक्तों के लिए बेहद खास होता है क्योंकि इसी दिन भगवान शिव ने काल भैरव रूप में अवतार लेकर अधर्म और अहंकार का नाश किया था।इसे भैरव अष्टमी, कालाष्टमी या काल भैरव जयंती के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन काल भैरव मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, भैरव चालीसा और रात्रि जागरण का आयोजन किया जाता है। भगवान काल भैरव की पूजा से भय, रोग, अकाल मृत्यु और नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं। जो व्यक्ति ईमानदारी से उनकी आराधना करता है, उसे जीवन में साहस, आत्मबल और सफलता प्राप्त होती है। काल भैरव को काशी का कोतवाल भी कहा जाता है। भैरव जी की पूजा से राहु-केतु और शनि जैसे ग्रह दोष शांत होते हैं। भक्त इस दिन सरसों के तेल ...
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