प्रयागराज, जून 15 -- प्रयागराज के पर्यटन को बढ़ाने और रमणीय स्थलों के विकास की बातें जितनी की जाती हैं उतनी धरातल पर साकार होती नहीं दिखतीं। जिम्मेदार प्रस्ताव बनाते हैं और फिर वह फाइलों से बाहर नहीं निकलता। ऐसी ही स्थिति है झूंसी के कनिहार झील एवं पक्षी विहार के प्रस्ताव की। कई बार घोषण की गई, लेकिन जिम्मेदारों की उदासीनता के कारण योजना मूर्त रूप नहीं ले पाई। झील बनाकर जहां नौका विहार का सपना दिखाया गया था वहां आज पांटून का गोदाम है। आपके अपने अखबार 'हिन्दुस्तान ने 'बोले प्रयागराज शृंखला के तहत प्रस्तावित झील और पक्षी विहार की योजना पर लोगों की राय जानी तो वह सपना दिखाने वाले जिम्मेदारों को कोसने लगे। कहा कि जिम्मेदार जरा भी गंभीर होते तो योजना वर्षों पहले मूर्ति रूप ले लेती। झील बनता तो पर्यटक आते, लोगों को रोजगार मिलता। शहर को रमणीय स्...
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