सहारनपुर, नवम्बर 8 -- कथा व्यास आचार्य सुभाष बहुगुणा ने कहा कि श्रीमद् भागवत मनोरंजन नहीं बल्कि आत्मरंजन का ग्रंथ है कथा के श्रवण से पितृ भी पार उतर जाते हैं। होली चौंक पर आयोजित कथा में उन्होने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा पीढियों का कल्याण करने वाली है और कथा श्रवण से भक्ति, ज्ञान व वैराग्य प्राप्त होता है। कहा क प्रभु सिमरन के लिए ही हमें मानव जीवन मिला है लेकिन लोभ और मोह के वशीभूत होकर हम सब भूल जाते हें। और बार-बार जीवन-मरण के चक्र में फंस कर दुखों को प्राप्त करते हें। अभिमन्यु पुत्र परिक्षित की कथा क साथ ही उन्होने कलयुग आरंभ होने की कथा सुनाई। कथा आरंभ होने पूर्व कथा व्यास का स्वागत कर कथा वाचक को माला पहनाकर व्यास गद्दी पर बैठाया।
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