बस्ती, नवम्बर 12 -- बस्ती, निज संवाददाता। गोपियां ईश्वर के लिये जीती थीख् इसलिये उन्हें प्रेम सन्यासिनी कहा गया। प्रभु प्रेम में हृदय का द्रवित होना ही मुक्ति है। कृष्ण कथा और बांसुरी का श्रवण करते समय चाहें आंखे खुली ही क्यों न हो समाधि लग जाती है। कृष्ण कथा में प्राणायाम करने की कोई आवश्यकता नहीं है। यह जगत को भुला देती है। स्वाद गोपियों के माखन में नहीं प्रेम में था। यशोदा के हृदय में बसा हुआ कन्हैया जागा है किन्तु हमारे हृदय का कन्हैया सोया हुआ है। यह बातें कथा वाचक आचार्य संदीप शरण शुक्ल ने बेलगड़ी में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पांचवे दिन कहीं। कथा वाचक ने कन्हैया के बाल लीला के प्रसंगो, माखन चोरी आदि प्रसंगों का विस्तार से वर्णन किया। इस मौके पर आशा शुक्ला और अष्टभुजा प्रसाद शुक्ल, दुर्गा प्रसाद शुक्ल, डॉ.जगदंबा प्रसाद, डॉ.अंबिका प्...
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