लखनऊ, फरवरी 23 -- अमर कथाकार अमृतलाल नागर की ऐतिहासिक ड्योढ़ी पर शहर के प्रबुद्ध जनों ने श्रद्धा के फूल चढ़ाए। खंडहर में परिवर्तित हो चुके उनके आवास पर रविवार को लोगों ने पुष्पांजलि दी तथा बान वाली गली स्थित सेठ पन्नालाल अग्रवाल धर्मशाला में लोक संस्कृति शोध संस्थान की ओर से आयोजित लोक चौपाल में नागर जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तार से चर्चा की। लोक संस्कृति विशेषज्ञ शाखा बंद्योपाध्याय ने नागर जी से जुड़े संस्मरण साझा करते हुए उनकी रचनाधर्मिता, सहजता, सरलता और व्यापक लोक-स्वीकार्यता पर प्रकाश डाला। उन्होंने नागर जी की कृतियों के डिजिटलीकरण के लिए उनके पुत्र शरद नागर एवं प्रपौत्रियों प्रो. ऋचा नागर और डा. दीक्षा नागर के प्रयासों की सराहना की। नागर जी के उपन्यास नाच्यो बहुत गोपाल के लेखन काल में उनके लिपिक और बाद में संगीत नाटक अकादम...