वाराणसी, दिसम्बर 8 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। भगवान शिव के चरित्र का लीला माधुर्य पौराणिक संस्कृति में रचा-बसा है। इसी संस्कृति में भारतीय अध्यात्म की सूत्रात्मकता का आभास भी होता है। कथाएं मानव संस्कृति की ऐसी देन हैं जो स्वयं में इतिहास को संजोकर सत्य को स्थापित करती हैं। ये बातें स्वामी भगवान वेदांताचार्य ने कहीं। वह फलाहारी बाबा आश्रम की ओर से शिवपुर रामलीला मैदान में हो रहे महालक्ष्मी महायज्ञ के निमित्त आयोजित शिवमहापुराण कथा के चौथे दिन सोमवार को प्रवचन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भगवान शिव वर्णों, सूक्तों और वेद की ऋचाओं में ही समाहित नहीं हैं। वह तो वेदना की पुकार और भक्त के निनाद में भी समाहित हैं। यदि कोई देव वैभव की पराकाष्ठा से भी ऊपर है तो वह एकमात्र शिव ही हैं। श्रुति बोधक ज्ञान उन्हीं की देन है। उन्होंने कहा कि यह श्रुति ब...
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