सिमडेगा, अक्टूबर 11 -- सिमडेगा, प्रतिनिधि। सिमडेगा आज पूरे देश में बेटियों के दम पर हॉकी की नर्सरी के नाम से जाना जाता है। यहां की बेटियों ने मिट्टी, धूल और अभाव के बीच भी हौसले का ऐसा खेल खेला। जिसने न सिर्फ झारखंड बल्कि भारत का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया। सफलता की यह कहानी आसान नहीं रही। इन बेटियों ने कठोर परिश्रम, गरीबी और सीमित संसाधनों के बावजूद कभी हार नहीं मानी। कभी टूटी हुई हॉकी स्टिक से खेला, तो कभी बिना जूते के मैदान में उतरीं। पर उनके इरादे कभी नहीं टूटे। सलीमा टेटे, ब्यूटी डुंगडुंग, संगीता कुमारी, रजनी टोप्पो, सुषमा कुमारी, सुमराय टेटे, पूर्व कप्तान असुंता लकड़ा, अलका डुंगडुंग, अभय एक्का, सुमराय टेटे, कांति बा:, एडलिन केरकेट्टा, मसीरा सुरीन, प्रीति सुनिला किड़ो, अनिता शोषण बेक, मरीता तिर्की, पुष्पा प्रधान, एनोसेंट ...
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