नई दिल्ली, जनवरी 1 -- नई दिल्ली, कार्यालय संवाददाता। कभी साफ पानी, पक्षियों की चहचहाहट और जैव विविधता के लिए पहचाने जाने वाले झड़ोदा तालाब आज अपनी बदहाली की कहानी खुद बयां कर रहा है। कचरे के ढेर ने इस जलस्रोत के अस्तित्व पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि अब यह मामला राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) तक पहुंच गया है। यहां केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने तालाब की स्थिति को लेकर रिपोर्ट दाखिल की है। रिपोर्ट में बताया गया कि कचरे के ढेर के कारण तालाब का अस्तित्व संकट में है। हैरानी की बात यह है कि नमभूमि (संरक्षण और प्रबंधन) नियम, लागू होने के बावजूद दिल्ली में मौजूदा समय में एक भी तालाब को आधिकारिक रूप से अधिसूचित नहीं किया गया है। दिल्ली नमभूमि प्राधिकरण के रिकॉर्ड में सिर्फ दो तालाब दर्ज हैं, जो यमुना बायोडायवर्सिटी प...
Click here to read full article from source
To read the full article or to get the complete feed from this publication, please
Contact Us.