विकासनगर, जनवरी 11 -- जौनसार बावर में आध्यात्मिक जागरण की दृष्टि से चालदा महाराज की प्रवास यात्रा का विशेष महत्व है। जब भी देवता की यात्रा विभिन्न खतों में होती है तो हजारों श्रद्धालु दर्शन को पहुंचते हैं। स्थानीय ग्रामीण भंडारे की व्यवस्था करते हैं। विगत वर्षों में भंडारों में शराब व मांस परोसने का प्रचलन था। अब खत कोरु के निवासियों ने इसे समाप्त कर भंडारे में घी परोसने का निर्णय लिया है। इस निर्णय से खतवासियों ने नई मिसाल कायम की है। जौनसार बावर में चालदा महासू देवता की दो प्रमुख प्रवास यात्राएं होती हैं। एक चालदा महाराज की प्रवास यात्रा जौनसार बावर के कुछ हिस्सों व हिमाचल तक जाती है। इसकी डोली वर्तमान में हिमाचल के पश्मी में विराजमान है। दूसरी गढ़ का चालदा के नाम से जानी जाती है। यह जौनसार के लगभग 14 खतों में परिक्रमा करती है और अपने प...