नई दिल्ली, जनवरी 25 -- नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की वित्तीय जरूरतें तेजी से बढ़ रही हैं और इन्हें पूरा करने के लिए राज्य सरकार अब पहले से ज्यादा बाजार कर्ज पर निर्भर होती जा रही हैं। राज्य सरकारें लंबी अवधि के बॉन्ड जारी कर पैसा जुटा रही हैं। इससे राज्यों की गारंटियों का बोझ भी बढ़ रहा है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की तरफ से जारी राज्य वित्त: 2025-26 के बजटों की अध्ययन रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि राज्यों के कुल राजकोषीय घाटे (जीएफडी) का करीब 76 प्रतिशत हिस्सा बाजार से उधारी के जरिए पूरा किया जाएगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि कई राज्यों का कर्ज स्तर चिंता का विषय बना हुआ है। मार्च 2024 के अंत में राज्यों का कर्ज घटकर जीडीपी के 28.1 प्रतिशत पर आ गया था, लेकिन मार्च 2021 में 31 प्रतिशत के शिखर पर पहुंचा। ...
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