बुलंदशहर, अक्टूबर 13 -- गांव गिरधरपुर नवादा में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के सातवें दिन गोपी गीत, कंस वध ,उद्धव गोपी संवाद, श्रीकृष्ण-रुक्मिणी के विवाह का वर्णन किया गया। कथावाचक आचार्य बलदेव कृष्ण ने बताया पंच गीत भागवत के पांच प्राण हैं, जो भी ठाकुर जी के इन पांच गीतों को भाव से गाता है, वह भव पार हो जाता है। कथा व्यास ने भगवान का मथुरा प्रस्थान, कंस का वध, महर्षि संदीपनी के आश्रम में विद्या ग्रहण करना, उद्धव गोपी संवाद द्वारा गोपियों को अपना गुरु बनाना, द्वारिका की स्थापना एवं रुक्मणी विवाह के प्रसंग का संगीतमय भावपूर्ण पाठ किया। आचार्य ने कहा कि जीव और ब्रह्मा के मिलने को ही महारास कहते हैं। कथा में भजन सुन मुरली की तान दौड़ आई सांवरिया पर श्रोता भावविभोर होकर नाचने लगे। उन्होंने कहा कि आस्था और विश्वास के साथ भागवत प्राप्ति होती है।
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