वाराणसी, नवम्बर 30 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। सिद्धपीठ औघड़नाथ तकिया पर शीघ्र ही शोधपरक स्मारिका प्रकाशित की जाएगी। वर्तमान महंत शिवानंद गिरि महाराज ने बताया कि यह स्थान सदियों पुराना है। कई सिद्ध साधकों ने यहां साधना की और जनोपयोगी कार्य किए परंतु उनके बारे में बहुत कम जानकारी समाज को है। इसलिए यह सोचा गया है कि तकिया के बारे में शोधपरक स्मारिका प्रकाशित की जाए। वार्षिक शृंगार महोत्सव में रविवार को उपस्थित भक्तों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि समाज को अभय प्रदान करने में इस स्थान की बड़ी भूमिका रही है। औरंगजेब ने सत्ता के मद में जब इस स्थान को तोड़ना चाहा तो अंधा हो गया। यहां क्षमा याचना कर दिल्ली लौट गया। यहां के संत बाबा मसाननाथ ने समाज के हाशिए के लोगों के बीच चिता भस्म से होली खेलने की परंपरा शुरू की थी। यह परंपरा आज भी जारी ह...