भभुआ, जनवरी 30 -- कर्ज लेकर ऑटो खरीद दिनभर की मेहनत से मिले पैसों से चला रहे परिवार का खर्च दुकानदारों, सवारियों और पुलिस के दबाव में गुजरता हर दिन, घर लौटने पर सकून (बोले भभुआ) भभुआ, नगर संवाददाता। शहर की सड़कों पर सवारी के इंतजार में खड़े ऑटो चालकों के लिए सड़क ही रोजगार और कमाई की आखिरी उम्मीद बनी है। रोजी-रोटी की तलाश में किसी ने घर की जमा पूंजी लगा दी, तो किसी ने कर्ज लेकर टेंपो या ई-रिक्शा खरीदा। पढ़े-लिखे होने के बावजूद जब कहीं नौकरी नहीं मिली, तो मजबूरी में सवारी ढोना ही जीवनयापन का साधन बन गया। टेंपो चालकों का कहना है कि सुबह से देर शाम तक कड़ी मशक्कत के बाद मुश्किल से 300 से 400 रुपये की आमदनी हो पाती है। इसी सीमित कमाई से बच्चों की पढ़ाई, घर का राशन और रोज़मर्रा के खर्च पूरे किए जाते हैं। इसके बावजूद हालात आसान नहीं हैं। उन्होंने कहा...