नई दिल्ली, सितम्बर 23 -- दिल्ली के एम्स अस्पताल में पिछले साल शुरू हुआ 'पायोधि' मिल्क बैंक अपनी पहली सालगिरह मना चुका है, लेकिन कहानी उतनी चमकदार नहीं, जितनी उम्मीद थी। छोटी-छोटी बूंदों से शुरुआत करने वाला यह दूध बैंक अब भी अपनी पूरी रफ्तार पकड़ने की जद्दोजहद में है।दूध की बूंदें, जिंदगी की आस पिछले महीने, आठ माताओं ने मिलकर 25 लीटर दूध दान किया। यह आंकड़ा छोटा लग सकता है, लेकिन इसके पीछे की मेहनत और मकसद बड़ा है। एम्स के नवजात शिशु विभाग के प्रोफेसर डॉ. रमेश अग्रवाल कहते हैं, 'मां के दूध की हर बूंद कीमती है। खासकर उन नन्हे शिशुओं के लिए, जो 32 हफ्तों से पहले जन्म लेते हैं या जिनका वजन 1.5 किलो से कम होता है।' दान किया गया दूध इन बच्चों के लिए संजीवनी का काम करता है, खासकर तब जब मां अपनी सेहत की वजह से दूध नहीं पिला पाती।शुरुआत से अब तक क...