गोंडा, नवम्बर 11 -- गोंडा, विधि संवाददाता। चिकित्सीय गर्भ समापन अधिनियम-1971(एमटीपी एक्ट) महिलाओं को उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के साथ ही उनकी गरिमा की सुरक्षा का अधिकार देता है। उक्त बातें अपर जिला जज व जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव दानिश हसनैन ने महिला अस्पताल के सभागार में गर्भपात अधिनियम पर आयोजित जागरूकता कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहीं। एडीजे ने कहा कि एमटीपी एक्ट ने उन परिस्थितियों को कानूनी मान्यता दी, जिनमें गर्भपात को चिकित्सीय रूप से आवश्यक या उचित समझा जा सकता है। इससे पहले गर्भपात को आईपीसी की धारा 312 के तहत अपराध माना जाता था। इस अधिनियम के अनुसार, यदि गर्भ जारी रखने से महिला के जीवन को खतरा हो, उसके शारीरिक या मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना हो, भ्रूण में गंभीर विकृति हो, या गर्भ बलात्कार ...