लखनऊ, नवम्बर 28 -- लखनऊ। संवाददाता इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया के चेयरमैन मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने असम विधानसभा में पारित 'बहुविवाह निषेध विधेयक-2025' पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हमारे मुल्क के संविधान ने हर व्यक्ति को अपने मजहब पर अमल करने की पूरी आजादी दी है और धार्मिक स्वतंत्रता सभी का मौलिक अधिकार है। हर समुदाय को इस बात का भी कानूनी हक है कि वह अपने निजी मामलों में अपने पर्सनल कानूनों पर अमल कर सकता है। उन्होंने कहा कि एक से ज्यादा शादी का कॉन्सेप्ट इस्लाम का हिस्सा है, लेकिन एक से ज्यादा शादी में इतने सख्त नियम है कि 99.99 प्रतिशत मुसलमान एक ही शादी करते हैं। मौलाना ने कहा कि यदि फैक्ट पर बात की जाए तो एक से अधिक शादी करने वालो की संख्या अल्पसंख्यक समाज से अधिक बहुसंख्यक समाज में है। मुल्क में कानून संविधान के दायरे में बनना ...