गढ़वा, सितम्बर 13 -- मेराल, प्रतिनिधि। एक साल से अपना पैतृक घर छोड़कर खानाबदोश का जीवन जी रहे आदिम जनजाति परिवार वनभूमि पर झोपड़ी बना रह रहे हैं। पिछले साल 10 से 12 जनवरी तक हाथियों ने जबर्दस्त उत्पात मचाया था। हाथियों ने सभी 17 परिवारों के घर गिरा दिए थे। सभी लोग बेघर हो गए। उस दौरान कड़ाके की ठंड थी। बच्चों के साथ स्कूल की छत पर शरण लिए हुए थे। छत पर खुले आसमान में बच्चों के साथ रह रहे थे। उन दिनों को याद कर रूह कांप जाता है। यह आपबीती सुनाती प्रखंड के बहेरवा गांव की महिलाओं की आंखें नम हो जाती हैं। जब फिर से उन्हें घर बनाना मुश्किल हो गया तब वहां से चार किलोमीटर दूर गेरूआसोती आकर वनभूमि पर झोपड़ी बनाकर रहने लगे। यहां भी समस्या कम नहीं है। झोपड़ी में सांप बिच्छू, सियार सहित अन्य जंगली जानवरों के हमले का डर बना रहता है। दफ्तर-दफ्तर चक्कर ...
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