हापुड़, नवम्बर 23 -- हवा की रफ्तार कम होने और बारिश न होने के कारण नवंबर के 15 दिन से हापुड़ की आबोहवा ने लोगों को सांस लेने में दिक्कत कर दी है। लगातार रेड जोन में चल रहे हापुड़ ने अब फेफड़ों पर असर डालना शुरू कर दिया है। जिले के अस्पतालों में खांसी-नजला और बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। खांसी के लिए सरकारी अस्पतालों से एक सप्ताह में 4 हजार से अधिक सिरप चले गए हैं। ग्रेप 3 स्टेज लागू होने के बाद शासन ने गाजियाबाद-नोएडा के साथ साथ हापुड़ में भी डीजल के ऑटो पर रोक लगा दी गई है। लेकिन धरातल पर ग्रेप 3 की रोक दिखाई नहीं दे रही है। हाईवे किनारे चल रही फैक्ट्रियों की चिमनी का धुआं खुद प्रदूषण के हालात बता रहा है। इसके अलावा जिले में अवैध काम करने वालों के डंफर धूल उड़ा रहे हैं। मिट्टी खनन पर नहीं रोक-- जिले में अवैध ढंग से चल रहा मिट्टी...