वाराणसी, नवम्बर 18 -- वाराणसी, वरिष्ठ संवाददाता। पश्चिम की भौतिकवादी दृष्टि ने प्रकृति, पर्यावरण एवं विश्व में अशान्ति को जन्म दिया है। जिसका समाधान न पूंजीवाद से है, न साम्यवाद से। उसका समाधान पं. दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म दर्शन से ही है। ये विचार काशी शब्दोत्सव के दूसरे दिन सोमवार को आर्गनाइजर साप्ताहिक पत्रिका के सम्पादक प्रफुल्ल केतकर ने व्यक्त किए। बीएचयू के संस्कृत विभाग और विश्व संवाद केंद्र की ओर से आयोजित कार्यक्रम के दूसरे दिन 'पं. दीनदयाल उपाध्याय की आध्यात्मिक राष्ट्रीयता एवं एकात्म जीवन-दर्शन' सत्र में वह मुख्य अतिथि थे। सत्र में एचएन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विवि के कुलपति प्रो. श्रीप्रकाश ने कहा कि पं. दीनदयाल उपाध्याय का एकात्म दर्शन किसी प्रकार का भेदभाव स्वीकार नहीं करता। प्रो. हिमांशु चतुर्वेदी ने कहा कि भारत की मूल पहच...