शामली, नवम्बर 13 -- शहर के जैन धर्मशाला में गुरुवार को श्री 108 विमर्श सागर महामुनिराज के सान्निध्य में विमर्श उत्सव का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रेमचंद, संजीव कुमार जैन परिवार द्वारा झंडा आरोहण एवं दिनेश जैन, मयंक जैन परिवार द्वारा मंडप उद्घाटन से हुआ। जैन मुनि विमर्श सागर ने कहा कि उत्साही शक्ति ही जीवन की प्रगति और आनंद का रहस्य है। उन्होंने कहा कि उत्साह वह आंतरिक ऊर्जा है, जो व्यक्ति को उन्नति, सफलता और आत्मिक शांति की ओर ले जाती है। आत्मा में अनंत शक्तियों में से उत्साही शक्ति तब प्रकट होती है, जब व्यक्ति के भीतर शुभता, करुणा और परोपकार का भाव जागृत होता है। कहा कि अक्सर लोग यह भ्रम पाल लेते हैं कि किसी भी कार्य को जोश से करना उत्साह है, जबकि सच्चा उत्साह सद्भाव, दया और परोपकार से उत्पन्न होता है। हिंसा या दुर्व्यवहार...
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