हरिद्वार, फरवरी 2 -- उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय में महिला प्रकोष्ठ के तत्वावधान में दो से छह फरवरी तक चलने वाली साप्ताहिक आत्मसुरक्षा कार्यशाला के शुभारंभ पर विवि कुलपति प्रो. रमाकान्त पांडेय ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में आत्म सुरक्षा को क्रीड़ा के रूप में अध्ययन न करके विद्या के रूप में अध्ययन करवाया जाता रहा है। प्रो. पांडेय ने कहा कि वर्तमान में इस प्रकार की कार्यशालाओं को विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास और आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए अत्यंत उपयोगी आवश्यक है। उन्होंने भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रमों के आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया। महिला प्रकोष्ठ की नोडल अधिकारी डॉ. श्वेता अवस्थी ने कार्यशाला की रूपरेखा प्रस्तुत की और इसके उद्देश्य पर प्रकाश डाला। क्रीड़ा अधिकारी चंद्रशेखर शर्मा ने साप्ताहिक कार्यशाला से संबंधित आवश्यक दिशा-निर्द...
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