हल्द्वानी, नवम्बर 15 -- बृजेंद्र मेहता हल्द्वानी। केंद्र सरकार की पहल 'राह-वीर योजना' का मकसद सड़कों पर घायल लोगों की मदद करने वाले इंसानों को सम्मानित करना था। लेकिन, उत्तराखंड में छह माह बीतने के बाद भी एक भी 'राह-वीर' सामने नहीं आया। 25,000 रुपये का नकद इनाम, प्रशंसा प्रमाणपत्र और कानूनी सुरक्षा जैसी सुविधाएं मिलने के बावजूद जागरूकता की कमी से लोग आगे नहीं आ रहे हैं। उत्तराखंड में सड़क हादसों के वक्त सबसे पहले स्थानीय लोग ही मदद को आगे आते हैं। एनडीआरएफ या एसडीआरएफ से पहले स्थानीय ग्रामीण और राहगीर मौके पर पहुंचकर घायलों को राहत पहुंचाते हैं। इसके बावजूद, अप्रैल 2025 में शुरू हुई केंद्र सरकार की योजना अब तक धरातल पर सफल नहीं हो पाई है। पिछले छह माह में परिवहन विभाग और पुलिस को एक भी आवेदन नहीं मिला है। आरटीओ प्रशासन डॉ. गुरदेव सिंह और आर...
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